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“राज कौशल की हंसी हमेशा याद आएगी”

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राज कौशल
राज कौशल

49 की उम्र कोई छोड़कर चले जाने की उम्र नहीं है। मुझे राज कौशल के बारे में तब पता चला, जब उन्होंने 1999 में ‘प्यार में कभी-कभी‘ नामक एक फिल्म का निर्देशन किया था।

यह उल्लेखनीय तो नहीं, लेकिन प्यारी कहानी थी। इसमें रिंकी खन्ना (ट्विंकल की बहन ), संजय सूरी, श्वेता साल्वे और डिनो मोरिया जैसे सभी नए कलाकार थे।

मेरे पुराने दोस्त डीनो दुःखी होकर कहते हैं, “मैं अभी-अभी श्मशान से निकला हूँ। मुझे बहुत दुख हुआ। राज काफी जिंदादिल और हंसमुख इंसान थे।  इतनी कम उम्र में उनके साथ ऐसा कैसे हो सकता है?” राज और उनकी पत्नी मंदिरा बेदी दोनों ही स्वास्थ्य के प्रति सबसे अधिक जागरूक और फिटनेस का पालन करने वाले थे। डिनो याद करते हुए कहते हैं कि “राज के साथ मेरा पहला फिल्मी अनुभव ‘प्यार में कभी कभी’ था। संजय सूरी, रिंकी खन्ना, श्वेता साल्वे हम सभी काफी यंग थे। इस फिल्म के दो गाने मुसु मुसु हसी और वो पहली बार आज भी सभी गुनगुनाते हैं। ” डीनो को याद है कि उन्होंने राज के साथ बहुत समय बिताया था। “’प्यार में कभी कभी’ का प्रचार करते समय हम हमेशा साथ थे। ” ‘प्यार में कभी कभी’ के पांच साल बाद, राज कौशल ने ‘शादी का लड्डू’ निर्देशित की, जिसने उपेक्षित संजय सूरी को चमकने का मौका दिया। उन्हें अवसर देने पर सूरी ने किस तरह कृतज्ञता व्यक्त की थी, वह मुझे अभी भी याद है। उन्होंने कहा था, “ राज हमेशा प्रतिभा और कड़ी मेहनत का सम्मान करते हैं।मैं यह अवसर प्रदान करने के लिए राज कौशल का हमेशा ऋणी रहूंगा।“

फिर आई राज कौशल की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म एंथनी कौन है, जो मूल और पूरी तरह से सभी को पसंद आने योग्य थी। फिल्म की अपनी समीक्षा में मैंने लिखा था: “क्या यह एक मूल फिल्म है? यदि ऐसा है तो यह हाल ही के महीनों में सबसे बेहतरीन स्क्रिप्ट्स में से एक है। फिल्म में हेमंत चतुर्वेदी की सिनेमैटोग्राफी उत्कृष्ट है। पहले हाफ में सीपिया और ब्राउन शेड्स का इस्तेमाल और सेकंड हाफ में चटख रंगों से निर्देशक राज कौशल  की फिल्म अलग ही प्रभाव डालती है, जिससे आमतौर पर हिंदी व्यावसायिक सिनेमा में बचा जाता है। पीड़ित चंपक चौधरी उर्फ चैंप (अरशद) एक बच्चे की तरह गैंगस्टर (संजय दत्त ने जाने कितनी बार गैंगस्टर की भूमिका परफेक्शन के साथ निभाई है।) को अपनी कहानी सुनाते हैं। अरशद और मिनिषा लांबा के बीच के रोमांटिक सीन, जो अपनी पिछली फिल्मों से काफी बेहतर हो गए हैं, एक भरोसेमंद और प्यारे अंदाज में फिल्माए गए हैं।”

प्यार में कभी कभी के दौरान मैंने उसे चिढ़ाया कि कैसे चलते-चलते में बप्पी लाहिड़ी के गीत से उन्होंने शीर्षक चुराया है।राज कौशल  हमेशा हंसता रहता था। उसकी वह हंसी हमेशा याद आएगी।

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