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रीजनल इज द नेक्स्ट ग्लोबल: प्रतीक गांधी

प्रतीक बताते हैं, “मुख्यधारा-क्षेत्रीय, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय के बीच की दीवारें अब खत्म हो गई हैं। दर्शक कुछ भी निम्न स्तरीय मानने को तैयार नहीं हैं। दर्शक आज दुनिया भर की सर्वश्रेष्ठ सामग्री देख रहे हैं। अब सभी भाषाओं में शो के लिए समान दर्शक हैं। सिर्फ इसलिए कि आपका शो गुजराती में है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप की सामग्री में क्वालिटी नहीं है। विट्ठल तीदी हर्षद मेहता के चचेरे भाई नहीं हैं।”

“स्कैम“ से पहले सालों से गुजराती थिएटर और सिनेमा का अभिन्न हिस्सा रहे प्रतीक का कहना है कि भाषा चाहे जो भी हो, दर्शकों को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है। यह एक बड़ा बदलाव है, निर्माताओं को पता है कि दर्शक हर जगह समान हैं। कोई भाषा बाधा नहीं है। हम यहां स्पेनिश शो देख रहे हैं। वे शायद स्पेन में गुजराती सामग्री देख रहे हैं। मुझे लगता है कि क्षेत्रीय सामग्री में हमेशा कुछ न कुछ नयापन होता है। बंगाल, गुजरात, केरल और हर जगह से चुनने के लिए समृद्ध साहित्यिक विरासत है।

प्रतीक हमेशा क्षेत्रीय सामग्री की प्रशंसा करते हैं। उनका कहना है क्षेत्रीय फिल्मों और शो का मूल हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं। उच्च स्तरीय सामग्री प्रदान करने के मामले में वे मुख्यधारा की सिनेमा और शो की तुलना में वे हमेशा आगे रहेंगे। मुख्यधारा की सामग्री सूत्रों के आधार पर निर्देशित होती है। वहीं क्षेत्रीय सामग्री इससे मुक्त है। क्षेत्रीय सिनेमा में कोई स्टार और स्टारडम नहीं है। क्षेत्रीय कहानी कहने में सामग्री सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए मुझे लगता है कि रीजनल इज द नेक्स्ट ग्लोबल।

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